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Edition : 2025
Pages : 160
Binding : Paperback
Size : 21×14 cm
Language : Hindi
Author : Braj Vibhuti Bhagwat Shayamdas
ISBN : 978-93-92149-25-2
कृष्ण-प्रेममयी राधा, राधा-प्रेममयो हरि।’
अर्थात् कृष्णप्रेम का स्वरूप हैं- राधा
और राधाप्रेम का स्वरूप हैं- कृष्ण।’एक प्रान द्वै देह, हरद-चूने लौं रची समीति।”मिलेही रहत मानो कबहूँ मिले न।”राधा संग बिना नहिं श्याम,
श्याम बिना नहिं राधा नाम।”राधा कृष्ण स्वरूपां वै कृष्णं राधास्वरूपिणं।’
ऐसे अनेक उद्धरण रसिक सन्तों ने
अपनी अनुभूति और भगवद्-साक्षात्कार
के आधार पर प्रस्तुत किये हैं।अतः निष्कर्ष यह है कि-
श्रीराधा और श्रीकृष्ण तत्त्वतः एक ही हैं।
परब्रह्म श्रीकृष्ण लीलाविलास के लिए
दो रूपों में आत्मप्रकटन करते हैं।
श्रीकृष्ण की ह्लादिनी शक्ति हैं- श्रीराधा।
एकमात्र वे ही महाभावस्वरूपा हैं।श्रीराधा के बिना श्रीकृष्ण की आराधना और
श्रीकृष्ण के बिना श्रीराधा की आराधना
अकल्पनीय है और अशास्त्रीय है।प्रस्तुत ग्रन्थ श्रीराधा के बारे में भावरूप और
तत्त्व रूप से परिचय प्रदान करने वाला तो है ही
स्तुतियों के कारण नित्यपाठ व संकीर्तन
के लिए भी उपयोगी है।








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