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Edition : 2025
Pages : 466
Size : 21×15 cm
Binding : Paperback
Weight : 500 gm
Author : Swami Akhandanand Saraswati
Publishar : Sat Sahitya Prakashan
दो चीज़े आपस में इतनी मिल गयी है की हम भूल से दोनों को एक समझ रहे है। ये भ्रान्ति , भूल मिटने के लिए विवेक होता है विवेक का फल है , एक निशचय पर पहुँचाना। यदि विवेक के निशचय पर न पहुंचे , तो वह निष्फल हो जाता है। आप सोच विचार तो करे , उधेड़बुन तो करे , परन्तु किसी निश्चय पैर न पहुंचे विवेक करने पर भी। यदि आप दो वास्तुओ का विवेक करते है अलग अलग करते है तो उनमे की छोड़ने और की पकड़ने योग्य है। इसका निश्चय करे। और निश्चय के अनुसार वर्ताव करे। ” विवेक चूड़ामणि ” के कर्ता कहते है – जब आप इस निश्चय पर पहुंचेंगे की ” ब्रह्म सत्य है , जगत मिथ्या है ‘ ‘ जगत मिथ्या है ‘ ब्रह्म सत्य है ” तो ये विवेक करते करते आदीतीयता पर पहुंच गए तो आपका विवेक सफल हो गया।।।। ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या एवं निश्चय।।।।






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