विभूति योग (Vibhuti Yoga) भगवद्गीता का दसवां अध्याय है, जो भगवान कृष्ण की दिव्य महिमा और ब्रह्मांड में उनकी अभिव्यक्तियों पर केंद्रित है. ‘विभूति’ का अर्थ है ‘विशिष्ट शक्ति’ या ‘प्रकटीकरण की शक्ति’. इस अध्याय में, कृष्ण बताते हैं कि वे सृष्टि के सभी शक्तिशाली, सुंदर और पवित्र पहलुओं में प्रकट होते हैं, जिससे भक्तों को हर चीज़ में दिव्यता का अनुभव करने और अपनी भक्ति बढ़ाने में मदद मिलती है. यह अध्याय भक्त को अज्ञान के अंधकार को दूर करने और कृष्ण द्वारा निर्देशित होकर ज्ञानोदय प्राप्त करने की यात्रा में सहायता करता है.
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