वन पथ में श्री राम: Shri Rama in The Foresta रामायण ट्रस्ट (Ayodhya) द्वारा प्रकाशित “वन पथ में श्री राम” (Van Path Mein Shri Ram) पुस्तक, श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के दौरान की उनकी यात्रा, अनुभवों और आदिवासियों/वनवासियों के साथ उनके जुड़ाव का वर्णन करती है। यह 158-162 पृष्ठों की हिंदी पुस्तक श्रीराम के मानवीय गुणों, धर्म स्थापना और उनके द्वारा वन में किए गए सामाजिक कार्यों को रेखांकित करती है।
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