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Edition : 2025
Size : 21×14 cm
Language : Hindi
Pages : 448
Binding : Paperback
Author : Dr Avadh Bihari Lal Kapoor
यह ग्रन्थ मुख्य रूप से श्रीचैतन्य चरितामृत, श्रीचैतन्य भागवत और श्रीचैतन्य-मंगल जैसे महाप्रभु की लीला के प्राचीन ग्रन्थों के आधार पर लिखा गया है। महात्मा शिशिर कुमार घोष ने अपने बंगला ग्रन्थ ‘श्रीअमिय-निमाइ-चरित’ में महाप्रभु के समकालीन और उनकी लीलाओं के प्रत्यक्ष द्रष्टा कुछ पदकर्ताओं की पद-पदावलियों के सहारे उनके चरित्र को पुष्ट करते हुए उसका और भी भावपूर्ण ढंग से चित्रण किया है। मैंने उसका भी कहीं-कहीं अनुसरण किया है।
श्रीमिराबाई के
श्रीचैतन्य महाप्रभुअब तौ हरी नाम लौ लागी।
सब जग कौ यह माखन-चोरा, नाम धर्यो बैरागी ॥१॥
कित छोड़ी वह मोहन मुरली, कित छोड़ी सब गोपी।
मूँड़ मूँड़ाय डोरि कटि बाँधी, माथे मोहन टोपी ॥२॥
मात जसोमति माखन कारन, बाँधे जाके पाँव।
स्यामकिसोर भयो नव-गौरा, चैतन्य जाको नाँव ॥३॥
पीताम्बर को भाव दिखावै, कटि कोपीन कसै।
गौर-कृष्ण की दासी मीरा, रसना कृष्ण बसै ॥४॥








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