ईशावास्य उपनिषद (शुक्ल यजुर्वेद का 40वां अध्याय) 18 मंत्रों का एक छोटा किंतु गहन दार्शनिक ग्रंथ है, जो जगत में ईश्वर की सर्वव्यापकता, कर्मयोग, ज्ञान-अविद्या का समन्वय, और नि:स्वार्थ भाव से जीने की शिक्षा देता है। इसके प्रवचन ‘अहं ब्रह्मास्मि’ (मैं ब्रह्म हूँ) के बोध, स्व-साक्षात्कार और भौतिकवादी व आध्यात्मिक जीवन के संतुलन के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताते हैं।
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