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Edition : 2015
Pages : 56
Weight : 100 gm
Binding : Paperback
Author : Swami Akhandanand ji maharaj
Publishar : Sat Sahitya Prakashan
श्री उद्धव जी के पूछने पर भगवन श्री कृष्णा में उन्हें भिक्षुगीत सुनाया की भिक्षु ने अपने मन पर कैसे विजय प्राप्त की थी जिससे उसके अंदर सहन करने की शक्ति आयी। माने सेहन करने की शक्ति तब तब आवे जब मन पर विजय प्राप्त कर ले। ये एक बात । दूसरी बात ये है की प्रकर्ति – पुरुष विवेक हो जाये। तीसरी बात सत्वगुण , रजोगुण , तमोगुण की वृतियो पर विजय हो और चौथी , कुसंग का त्याग किया जाये – ये बाते अगर अपने जीवन आवे तो मनुष्य सहनशक्ति आती है श्री उडियाबाबजी महाराज कहा करते थे की बर्दाश्त करना ही सिद्धि है । जिसको संसार में सहन करना आ गया, उसने संसार में जीवन का रहस्य प्राप्त कर लिया। सहते चलो , बस।






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