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Edition : 2025
Size : 28×21 cm
Pages : 1052
Language : Hindi
Binding : Hardcover
Author : Karpatri Ji
Publishar : Radha Krishan Dhenuka Prakashan
श्री स्वामीजी महाराज का यह अभिनव प्रस्तुत ग्रन्थ-भक्ति-सुधा-भक्तिरसार्णव का ही अनुपूरक ग्रन्थ है। दोनों में सम्बन्ध है तथा प्रार्थक्य भी है। ‘भक्तिरसार्णव’ भक्ति का सिद्धान्त दर्शन प्रस्तुत करता है, तो ‘भक्ति-सुधा’ भक्ति के व्यवहार दर्शन की निदर्शिका है। फलत: दोनों ग्रन्थों में उपकार्योपकारक भाव विद्यमान है। ‘भक्ति-सुधा’ का प्रथम संस्करण तीन खण्डों में प्रकाशित हुआ था। प्रस्तुत संस्करण उसी का एक खण्ड में परिष्कृत, परिवृंहित एवं परिवर्धित स्वरूप प्रस्तुत करता है। यह विपुलकाय ग्रन्थ लगभग एक हजार पृष्ठों में समाप्त हुआ है। यह परिमाणत: ही विपुल एवं अभिराम नहीं है, प्रत्युत गुणत: भी कमनीय है एवं रमणीय है। स्वामीजी का यह मौलिक ग्रन्थ उनकी तप:पूत लेखनी का नि:सन्देह अद्भुत चमत्कार है। आरम्भ के कतिपय ले, भले ही परिणाम में न्यून हों, परन्तु वे गम्भीर तत्त्वों के प्रतिपादन में सर्वथा महनीय तथा मननीय है। भक्ति-सुधा के दो-तिहाई भाग लगभग सात सौ पृष्ठ भगवान श्रीकृष्ण की वृन्दावनलीला के ही नाना रूपों का साङ्गोपाङ्ग वर्णन कर रसिक विद्वानों के सामने चिन्तन एवं मनन की विपुल नूतन सामग्री प्रस्तुत करने में समर्थ है।






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