“भावरोग की रामबाण दवा” (Bhavrog Ki Ramban Dava) गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक है, जिसे पूज्य श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने लिखा है। यह पुस्तक आत्म-कल्याण के लिए प्रेरणादायक है और मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाने के उपाय बताती है। इसमें मनुष्य के मानसिक रोगों को दूर करने के लिए कुछ गुणों का वर्णन है, जिन्हें अपनाकर मनुष्य स्वस्थ हो सकता है।
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