महारानी कैकेयी (वन्दनीया अथवा निन्दनीया)- Maharani Kaikeyi (Vandaniya or Nindaniya)रामायण में महारानी कैकेयी का चरित्र विरोधाभासी है; जहाँ वे निंदनीय कृत्य (राम वनवास) के लिए जानी जाती हैं, वहीं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से उन्हें ‘परम वंदनीया’ भी माना जा सकता है क्योंकि उनके बिना राम का ‘लीला’ विस्तार और राक्षसों का संहार संभव नहीं था। मंथरा के प्रभाव में आकर उन्होंने राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजतिलक मांगा।
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