सुदीर्घकाल से रसिक-महानुभावों की अत्यन्त प्रबल अभिलाषा थी कि श्रीराधावल्लभ सम्प्रदायाचार्य वृन्दावन – रसरीति प्रवर्तक वंशीस्वरूप प्रेमावतार रसिकाचार्य अनंतश्री विभूषित गोस्वामी श्रीहित हरिवंशचंद्र महाप्रभु जी का सांगोपांग, एवं सरस शैली में जीवन चरित्र उपलब्ध हो, इसी उद्देश्य से इस ग्रंथ में श्रीहिताचार्य के विमल चरित्र को सरलता के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जिससे भावुकजन श्रीहिताचार्य के जीवन-वृत्त से संबंधित दिव्य लीलाओं का रसास्वादन कर सकें ।
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