दत्तात्रेय तंत्र प्रयोग में भगवान दत्तात्रेय के प्राचीन, शक्तिशाली अनुष्ठान और ज्ञान शामिल हैं, जो मंत्र साधना, कुंडलिनी, यंत्र प्रयोग और आत्म-साक्षात्कार, ऊर्जा निपुणता और वशीकरण ,मोहन ,स्तम्भन औरमारण जैसीआध्यात्मिक शक्तियों (सिद्धियों) की प्राप्ति के लिए तांत्रिक योग पर केंद्रित हैं, जो सभी अवधूत परंपराके ढांचे के भीतर ब्रह्मा, विष्णु और शिव को परम आंतरिक परिवर्तन और मुक्ति के लिए एकजुट करते हैं।
मुख्य पहलू:
दिव्य स्रोत: भगवान दत्तात्रेय, दिव्य त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) की शिक्षाओं पर आधारित।
लक्ष्य: व्यावहारिक आध्यात्मिक तरीकों के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार (आत्म-ज्ञान) और मोक्ष प्राप्त करना।
अभ्यास: इसमें मंत्र जप (मंत्र साधना), यंत्र पूजा, कुंडलिनी जागरण, ध्यान और तांत्रिक योग शामिल हैं।
प्रयोग (अनुष्ठान): विशिष्ट, प्रायः गुप्त, अनुष्ठान (प्रयोग) शक्तियों को प्रकट करने और बाधाओं पर विजय पाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिनमें देवता, मंत्र और विशिष्ट प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, कभी-कभी निद्रा-आधारित अभिव्यक्ति भी शामिल होती है।
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