परमप्रिय जीतूभाई शाह एवं श्रीमती सुहासबेन शाहकी और से बड़ोदामें १९ मई से २३ मई ८५ तक परम पूज्य महाराज श्री अखंडानंद सरस्वती के प्रवचन प्रशनोके रूप में हुए थे महाराजश्री के द्वारा दिए उत्तर शास्त्र – समुद्र से निकले रत्नो के सामान अध्भुत है आनंदायक है जिज्ञासु साधक पाठक इस पुस्तक का लाभ ले।
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